भविष्य के युद्ध के लिए नवाचार और रिसर्च जरूरी: राजनाथ सिंह
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भविष्य के युद्ध के लिए अनुसंधान और नवाचार को जरूरी बताते हुए तकनीकी आत्मनिर्भरता पर जोर दिया।
DRDO और उद्योगों के सहयोग से 4,500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश, 2,200 से ज्यादा तकनीकों का ट्रांसफर किया गया।
आधुनिक युद्ध में ड्रोन, AI और हाइपरसोनिक तकनीकों की बढ़ती भूमिका को देखते हुए भारत तेजी से अपनी सैन्य क्षमता मजबूत कर रहा है।
Prayagraj/ तेजी से बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के बीच भारत अपने रक्षा तंत्र को भविष्य के अनुरूप बनाने की दिशा में लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी आत्मनिर्भरता को आधुनिक युद्ध की सबसे बड़ी जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में युद्ध की दिशा प्रयोगशालाओं और नई तकनीकों से तय होगी, इसलिए देश को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा।
Prayagraj में आयोजित तीन दिवसीय नॉर्थ टेक संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। Russia-Ukraine Conflict का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कुछ ही वर्षों में पारंपरिक हथियारों की जगह ड्रोन, सेंसर और स्मार्ट तकनीकों ने ले ली है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध में अप्रत्याशित हमलों की क्षमता बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। इसके लिए सक्रिय रणनीति और उन्नत तकनीकी क्षमताओं का विकास जरूरी है। उन्होंने चेताया कि जो देश तकनीकी क्रांति को तेजी से अपनाएगा, वही भविष्य के युद्धों में निर्णायक बढ़त हासिल करेगा।
अनुसंधान और उद्योग का बढ़ता सहयोग
रक्षा मंत्री ने बताया कि सरकार ने रक्षा अनुसंधान को प्राथमिकता देते हुए Defence Research and Development Organisation (DRDO) के साथ उद्योग, स्टार्टअप्स और शिक्षण संस्थानों की भागीदारी को बढ़ाया है। रक्षा अनुसंधान बजट का 25 प्रतिशत हिस्सा इन क्षेत्रों के लिए आवंटित किया गया है, जिसमें अब तक 4,500 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं।
नई नीति के तहत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण शुल्क को समाप्त कर दिया गया है, जिससे उद्योगों को 2,200 से अधिक तकनीकों का लाभ मिला है। साथ ही, DRDO की परीक्षण सुविधाएं भी उद्योगों के लिए खोल दी गई हैं, जिससे नवाचार को नई गति मिल रही है।
उन्नत तकनीकों पर जोर
रक्षा मंत्री ने निर्देशित ऊर्जा हथियार, हाइपरसोनिक सिस्टम, क्वांटम तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने उद्योगों से इन क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल करने का आह्वान किया और सरकार की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत
उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों से रक्षा उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 में घरेलू रक्षा उत्पादन 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
Narendra Modi के नेतृत्व में शुरू की गई पहल जैसे iDEX और TDF ने निजी क्षेत्र की भागीदारी को मजबूत किया है।
ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण
रक्षा मंत्री ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए इसे तकनीकी युद्ध क्षमता का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन में BrahMos Missile और आकाश मिसाइल जैसे स्वदेशी हथियारों का प्रभावी उपयोग हुआ, जिसने भारत की सैन्य ताकत को प्रदर्शित किया।
इस संगोष्ठी में सेना, उद्योग, स्टार्टअप्स और शिक्षाविदों की भागीदारी से यह स्पष्ट हुआ कि भारत तकनीकी और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।